हॉस्टल | Sunil Guladi | Lyrics

हरियान्वी एल्बम के न्यू सॉन्ग में आवाज सुनील गुलाड़ी ने दी हैं। हॉस्टल गाने के बोल रोहताश गगसीनिया ने तैयार किए हैं जबकि म्यूज़िक विराज बंधु ने दिया हैं। सुनील गुलाड़ी और रेचल ने इस गाने में अपनी अहम भूमिका निभाई हैं। इस गाने का निर्देशन नोनीत वर्मा ने किया हैं।

प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिले हुये बहुत दिन हो गये हैं और उसका फ़ोन भी नहीं आता हैं मैसेज करने पर उसका रिप्लाई नहीं कर रहा हैं। प्रेमी के बिना अब उसका हॉस्टल में नहीं लग रही हैं और साऱी रात उसके सपने देखती रहती हैं। जिस प्रकार मछली बिना पानी के तड़पती रहती हैं उसकी ऐसा ही प्रेमिका हो रहा हैं। वो भी अपने आशिक के बीना उसकी याद में तड़प रही हैं।

Hostel Song Lyrics

ओ चार दिन होगये तेरीकॉल आई ना
ओ मैसेज भी करता तू रिप्लाई ना
पूरी आती नहीं नींद सारी रात रडके
तू शिखर दोपहरी तक जागता नहीं
आवे सै भतेरी तेरी याद मरजाने
मेरा हॉस्टल में भी दिल लागता नहीं

ओ लागी इश्क़ की बीमारी बाता ढूँढू कड़े बात मैं
तेरी बिना खोट बुलबुल फँसरी सै कैद में
क्यों करता जुबान के जावता नहीं
आवे सै भतेरी तेरी याद मरजाने
मेरा हॉस्टल में भी दिल लागता नहीं

लागे सै भुलेका तेरा कई बार दिन में
ओ मछली जु तड़पू सु चाँद तेरे बीन मैं
तेरे बिना यो ठिकाना कती फावता नहीं
आवे सै भतेरी तेरी याद मरजाने
मेरा हॉस्टल में भी दिल लागता नहीं

कति रहिया ना पढाई में ध्यान गगसीनिया
मैंने आके लेजा मानू तेरी शान
गली करिये से बाजा बाजता नहीं

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