कबड्डी | Kavita Shobu | Lyrics

कविता शोबू की आवाज़ में कबड्डी हरियानवी गीत वॉइस ऑफ़ हार्ट में प्रस्तुत़ हुआ हैं। इस गीत के बोल औरंगनगरिया ने लिखे हैं और म्यूज़िक कंपोजिंग एस.बी.एम स्टूडियो ने की हैं। इस गाने में मनिन्दर चौधरी और दीक्षा शर्मा अहम किरदार में नज़र आएँगे।

जब आशिक कबड्डी खेलने मैदान में उतरता हैं तो उसकी शान देखके प्रेमिका अपना होश खो बैठती हैं और बस उसे ही देखती रहती हैं। जब आशिक मैदान में शेर की तरह अपना रूप दिखाता हैं। उस वक्त उसकी साँस भी अटक सी जाती हैं और आशिक की इसी अदा पे प्रेमिका ने उसे अपना दिल दे बैठा हैं।

Kabaddi Song Lyrics

चुमके जद तू बड़े सै मैदान में
राम की सु देखती रहू सु तेरी शान मैं
देख आँख भी एकटक जाव साँस भी अटक जावे
जणू धरलिया होठा पे ब्लैक वो मैंने
मारे पट पट हाथ ढीला छोडके ने गात
तेरी देखनी कबड्डी आली रेड्डी मैंने

इसी किसी की मजाल तेरी रेड्डी पिट दे
कर लेवे जो शिकार शेर का
साड़ी टीम पे डिपेंट तेरी रेड्ड पे
आर पार वार जावे शेर
एक तू ही सै खिलाडी बाकी सारे अनाड़ी
मारे पट पट हाथ ढीला छोडके ने गात
तेरी देखनी कबड्डी आली रेड्डी मैंने

सखिया मेरी भी धाक की कसूती
ऊपर ते बलम दिलेर मिलग्या
और कोई मलंग जो चुमले माटी हो
गंद मरजाने तू दिलेर मिलग्या
मारे पट पट हाथ ढीला छोडके ने गात
तेरी देखनी कबड्डी आली रेड्डी मैंने

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