काला तिल | Tarun Panchal | Lyrics

नया हरियानवी गाना काला तिल जिसमे आवाज तरुण पांचल ने दी हैं। गीत का म्यूजिक टी.आर पानीपत ने कम्पोज किया हैं। सुमित तजपुरिया ने गीत के बोल लिखे हैं। अल्का शर्मा और बिजेंद्र खिवाल ने इस गाने में अपनी अहम भूमिका निभाई हैं।

गौरी के लाल टमाटर जैसे गालो पर काला तिल अलग ही नजर आ रहा हैं और अपनी आँखों में सुरमा सारे गौरी आशिक को खूबसूरत लग रही हैं। उसकी मीठी मीठी बाते आशिको को प्यारी लगती हैं और ऐसे लग रही हैं जैसे आसमान से परी उतर के आई हो।

Kala Til Song Lyrics

मोटी मोटी आंख्या में सुरमा काला गया खिल
लाल टमाटर वरगे गाला पे हां रे तेरा तिल

क्यों खामेंखा बैरी तेरा लहू जलावे सै
तेरे वरगे छोरा ना कितने जाल बिछावे सै

रब्ब ने तेरे हुस्न का कती चाहला फाड़ दिया
कोयले की खान ते जणू हीरा गाड़ दिया
जब मटक मटक के चाले तू धरती जावे हील
लाल टमाटर वरगे गाला पे हां रे तेरा तिल

मेरे जोबन ने ली अंगड़ाई बैरा ना किसी करड़ाई
मेरे डोरे ना गेरे हाय या रास कती भी ना आई
कदे तो मन की खोल बता दे तू के चाहवे सै
तेरे वरगे छोरा ना कितने जाल बिछावे सै

मीठी बोली सूरत साधी लागी घणी प्यारी
परिया वरगी छोरी जद तू जणू आसमान ते आरी
तने चाहवू सु घना ऐ ना जावे तोड़ दिल
लाल टमाटर वरगे गाला पे हां रे तेरा तिल

क्यों मीठी मीठी बात लगा रहया के तू चाहावे सै
घणा ही जुल्मी हो रहया सै
क्यों खामेंखा बैरी तेरा लहू जलावे सै
तेरे वरगे छोरा ना कितने जाल बिछावे सै

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